(केंद्र में मोदी सरकार 3 साल पूरे करने जा रही है. इस मौके पर क्विंट ये डिबेट शुरू कर रहा है कि क्या एनडीए सरकार वे वादे पूरे कर रही है, जो उसने 2014 में किए थे. इस आर्टिकल में केवल एक पक्ष पेश किया गया है. इसका दूसरा पक्ष आप AAP नेता आशुतोष के आर्टिकल में पढ़ सकते हैं.)
कहते हैं कि एक अच्छा मैनेजर वह होता है, जो चीजों को अलग ढंग से करता है, न कि कोई अलग चीज करता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले तीन साल से यही कर रहे हैं.
संसद में कई बार विपक्ष यह दावा कर चुका है कि मोदी सरकार की कई स्कीम उसके कार्यकाल में शुरू हुई थीं. यह दावा कई मामलों में सही है. प्रधानमंत्री खुद कुछ मौकों पर यह बात मान चुके हैं. लेकिन यह मायने नहीं रखता कि किसने स्कीम शुरू की, सवाल यह है कि किसने उसे असरदार तरीके से लागू किया.
मोदी सरकार ने कई कल्याणकारी योजनाओं के इंफ्रास्ट्रक्चर में जो सुधार किए हैं, उन पर नजर डालने से यह बात साफ हो जाती है कि उनमें सोच-समझकर ‘वैल्यू एडिशन’ किया गया है, जिससे उसके बेहतर नतीजे मिलें.

