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NRC से बाहर रह गए गोरखा समुदाय की आवाज- हम आपसे ज्यादा ‘भारतीय’

31 अगस्त को जारी एनआरसी की अंतिम सूची में गोरखा समुदाय के हजारों लोगों के नाम शामिल नहीं किए गए हैं.

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‘हमें यह नहीं मालूम था कि जिस देश की सरहदों की रक्षा करते हुए हमने हजारों कुर्बानियां दीं, उसी देश में हमें अपने देशभक्त होने और यहां के नागरिक होने का सबूत देना होगा. अव्वल तो यह कि सरकार वे सबूत भी नहीं मानेगी और हमें अपनी नागरिकता हासिल करने के लिए दर-दर घूमना होगा. कोर्ट-कचहरी और सरकारी नुमाइंदों की परिक्रमा करनी होगी. मानो, वे सूर्य हों और हम सौरमंडल के कोई क्षुद्र ग्रह. सच तो यह है कि हम गोरखा लोग आपसे कहीं ज्यादा देशभक्त और भारतीय हैं.’

अपनी वीरता के लिए मशहूर गोरखा समुदाय के एक युवक की ये चार लाइनें असम में गोरखाओं के सामने आई ताजा परेशानियों की वैसी पेंटिंग है, जिसे वे फिर कभी नहीं देखना चाहते.

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