पीएम मोदी की नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार, जब 2014 में सत्ता में आई थी, तो पेट्रोलियम कच्चे तेल के आयात पर भारत की हद से ज्यादा निर्भरता के बारे में चिंतित थी. भारत ने 2013-14 में 144 मिलियन टन कच्चे तेल का आयात किया था, जिसकी लागत 143 बिलियन अमेरिकी डॉलर थी.
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल 2015 में भारत की आयात निर्भरता को 2014 में 77 प्रतिशत से घटाकर 2022 तक 67 प्रतिशत करने की कसम खाई थी. मोदी सरकार ने इथेनॉल के लिए मेगा पुश (2025-26 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत मिश्रण) इसी लक्ष्य को साधने के लिए शुरू किया था.
मोदी सरकार आयात निर्भरता में अपने लक्ष्य के अनुसार कमी हासिल नहीं कर सकी. इसके बजाय, आयात निर्भरता अब 10 प्रतिशत बढ़कर 87 प्रतिशत हो गई है.

