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मिन्नल मुरली : क्या भारतीय सिनेमा दलित-बहुजन सुपरहीरो को कभी स्वीकार करेगा?

हॉलीवुड ने यह साबित कर दिया कि सुपरहीरो की श्रेणी केवल गोरे लोगों की लिए नहीं है...

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कॉमिक बुक्स, फिल्में, साहित्यिक कथाएं और राष्ट्रवादी इतिहास सभी हमारी धारणाओं और कल्पनाओं पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं. वहीं नायकों और दंत कथाओं की शानदार कहानियां हर किशोर के मन मस्तिक का अहम हिस्सा होती हैं, क्योंकि इन्हीं के प्रभाव से उनका वैश्विक नजरिया आकार लेता है. लेकिन विडंबना यह है कि हमारे बीच बहुत कम 'भारतीय' सुपरहीरो (Indian Superhero) मौजूद हैं और उनके बारे में हमारी धारणा अक्सर अमेरिकी पात्रों द्वारा आकार लेती है.

महत्वपूर्ण रूप से, भारत में सुपरहीरो की कहानियों का देश की सामाजिक और वर्गीय परिस्थितियों से कोई मजबूत संबंध नहीं है. उदाहरण के लिए, हमारे सुपरहीरो को अक्सर उच्च-जाति के महानगरीय लोगों के रूप में चित्रित किया जाता है, जो जाति असमानता और सामंती शासन जैसे अन्य सामाजिक मुद्दों से बेखबर रहते हुए सुपरविलेन्स से लड़ते हैं और उन्हें हराते हैं. कोई भी भारतीय सुपरहीरो दलित-बहुजन जनता को ब्राह्मणवादी शासन या अधिपत्य और वर्ग शोषण से मुक्त करने के लिए नहीं लड़ता है.

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