मराठा आरक्षण (Maratha Reservation) के अस्थिर मुद्दे ने महाराष्ट्र (Maharashtra) में स्थापित राजनीतिक खिलाड़ियों और उनकी राजनीति पर पानी फेर दिया है.
यह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सहित सत्ता में बैठे लोगों के एक वर्ग के लिए विशेष रूप से सच है, जो पहले से ही दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्यवाही का सामना कर रहे हैं, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य विधानसभा अध्यक्ष को 31 दिसंबर तक 16 विधायकों के भाग्य का फैसला करने का निर्देश दिया है.
पिछड़े मराठवाड़ा क्षेत्र से मनोज जरांगे पाटिल चार करोड़ की आबादी वाले समुदाय के लिए एक अप्रत्याशित नायक के रूप में उभरे हैं, यहां के युवा नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण के लिए बेचैन हैं.

