मणिपुर (Manipur Violence) में जारी हिंसा ने सैकड़ों लोगों की जान ली है. यहां आंतरिक संघर्ष ने गृह युद्ध का रूप ले लिया है लेकिन केंद्र उसके प्रति अब भी उदासीन है. इसकी चारों ओर आलोचना हो रही है, और लोग हैरान हैं कि केंद्र क्यों इस मसले पर दखल नहीं दे रहा.
सवाल उठाने स्वाभाविक हैं कि प्रधानमंत्री इस मसले से क्यों निपटना नहीं चाहते. क्या हालात सचमुच हाथ से निकल चुके हैं? या, जो नजर आ रही हैं, परतें उससे भी गहरी हैं? समय ही बताएगा कि मणिपुर का भविष्य क्या है.

