मणिपुर (Manipur) में पिछले दो महीने से ज्यादा वक्त से जातीय हिंसा भड़क रही है. कम से कम 140 लोग मारे गए हैं और 70,000 लोग विस्थापित हुए हैं. हिंसा के पीछे की राजनीति ने देश की संसद को निष्क्रिय कर दिया है.
फिर भी, भारत की प्रणाली में, किसी भी दोषी राजनीतिक नेताओं को दोषी ठहराने या उनके करीबियों को दंडित करने के लिए कोई संस्थागत संरचना मौजूद नहीं है. इससे भी बुरी बात यह है कि यह सुनिश्चित करने के लिए कोई ढांचा नहीं है कि, कम होने के बाद भी, ऐसी जातीय हिंसा फिर से न भड़के.

