पिछले साल अगस्त तक सुलेमान पठान, महाराष्ट्र के जामनेर कस्बे में अपने गांव का 'पोस्टर बॉय' हुआ करता था. वह अपने माता-पिता का एक आदर्श बेटा और गांव में गणपति उत्सव आयोजित करने वाली कमेटी का मुखिया था. दोस्तों और अनजानों, सबकी मदद के लिए वह हमेशा खड़ा रहता था और उसका सपना पुलिस फोर्स में शामिल होने का था.
लेकिन 11 अगस्त को सब कुछ बदल गया. कथित तौर पर एक भीड़ ने सुलेमान की पीट-पीटकर हत्या (Lynching) कर दी. हैरानी की बात यह है कि उस भीड़ में उसके कुछ सबसे करीबी दोस्त भी शामिल थे. वे सुलेमान की एक हिंदू नाबालिग लड़की से दोस्ती को लेकर गुस्से में थे.
उन्होंने इसे 'लव जिहाद' का नाम दिया, एक ऐसी थ्योरी जिसका कोई सबूत तो नहीं है, लेकिन हिंदू वर्चस्ववादी समूहों के बीच यह काफी लोकप्रिय है. इस थ्योरी के मुताबिक, मुस्लिम पुरुष हिंदू महिलाओं को अपने जाल में फंसाकर उनका धर्म परिवर्तन कराते हैं. भीड़ ने सुलेमान का अपहरण किया, उसे निर्वस्त्र किया और पांच घंटे से ज्यादा समय तक उसके साथ मारपीट की.
सुलेमान की मौत के कुछ ही समय बाद, जामनेर की सड़कों पर हिंदुत्ववादी कार्यकर्ता उतर आए और 'लव जिहाद' के खिलाफ सख्त कानून बनाने की मांग करने लगे.
भीड़ ने कानून की मांग की और सात महीने बाद महाराष्ट्र सरकार ने उनकी बात मान भी ली. 16 मार्च को महाराष्ट्र विधानसभा ने 'महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2026' को मंजूरी दे दी. कहने को तो यह कानून धर्म परिवर्तन को 'रेगुलेट' यानी नियंत्रित करने के लिए लाया गया है, लेकिन असल में यह इसे अपराध की श्रेणी में खड़ा कर देता है. यह कानून किसी व्यक्ति से उसकी पसंद का धर्म चुनने की आजादी छीनकर, यह फैसला करने का हक 'भीड़' के हाथों में सौंप देता है.
