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याद रखें.. Exit Polls को पॉपकॉर्न ही समझें..

अगर भविष्यवाणी फिर से गलत हो जाती हैं, तो एग्जिट पोल की इंडस्ट्री को दर्शकों और ऐसे सर्वे करने वाले चैनलों का विश्वास हासिल करने में लंबा समय लग सकता है.

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महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनावों के एग्जिट पोल आ गए हैं. अलग-अलग एजेंसियां ​​अलग-अलग संख्याएं लेकर आई हैं जो वोटरों और दर्शकों को अनुमान लगाने पर मजबूर कर देंगी कि दोनों राज्यों में सरकार किसकी बनने जा रही है. 23 नवंबर को वे अपने टीवी सेटों से चिपके रहेंगे.

एग्जिट पोल आम तौर पर ओपिनियन पोल की तुलना में बेहतर बैरोमीटर होते हैं, और यदि सीटों के मामले में बिल्कुल सटीक नहीं होते हैं, तो भी वे चुनाव के रुझान की दिशा का संकेत जरूर देते हैं. हालांकि, 2024 के आम चुनावों और उसके बाद हुए हरियाणा विधानसभा चुनावों में एग्जिट पोल फेल साबित हुए और लोगों ने उनकी प्रासंगिकता पर सवाल उठाया है.

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