गुजरात हाई कोर्ट ने एक सराहनीय काम किया है, जो बाकी हाई कोर्ट्स और यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट भी नहीं कर पाया. बाकी की अदालतों ने धर्म परिवर्तन विरोधी कानूनों पर राज्यों को सिर्फ कारण बताओ नोटिस जारी किए (सच्चाई यह है कि ‘लव जिहाद’ से निपटने के लिए ही ये कानून बनाए गए हैं), लेकिन गुजरात हाई कोर्ट ने इस संबंध में तत्काल कार्रवाई की जिसकी तारीफ की जानी चाहिए.
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दूसरे राज्यों के धर्म परिवर्तन विरोधी कानूनों को चुनौतियां दी गईं लेकिन किसी को कोई अंतरिम राहत नहीं मिली. हां, गुजरात हाई कोर्ट ने 19 अगस्त को एक गंभीर अंतरिम आदेश जारी किया. इस आदेश में हाई कोर्ट ने उन प्रावधानों पर रोक लगा दी है जो शादी के लिए अपनी मर्जी से धर्म बदलने पर लागू होते हैं.

