ईश्वरचंद्र विद्यासागर उन लोगों में से थे, जिनके बारे में कहा जाता है कि होनहार बीरवान के होत चीकने पात. साथ ही, वे उनमें से नहीं थे, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे मुंह में चांदी का चम्मच लेकर जन्मे हैं. उन्हें रवीन्द्रनाथ या राममोहन राय जैसा आर्थिक रूप से संपन्न जीवन नहीं मिला था. वे उन लोगों में से नहीं थे, जो हिन्दू चिंतन-परंपरा की अधकचरा जानकारी के आधार पर उसकी निंदा-प्रशंसा करते रहते हैं.
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