सेम सेक्स शादियों (Same Sex Marriage) पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने दलील दी थी कि इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती क्योंकि देश के 99 प्रतिशत लोग इसे स्वीकार नहीं करते. अगर इस तर्क को खारिज कर दिया जाए तो भी इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि लोगों में होमोफोबिया (Homophobia), ट्रांसफोबिया (Transphobia) गहरी जड़ें जमाए हुए है.
घरों के अलावा शैक्षणिक संस्थान वह खास स्पेस होते हैं जहां हम अपना ज्यादा से ज्यादा समय बिताते हैं, और वहीं हमारी बुनियादी समझ विकसित होती है. लेकिन ये जगहें ही कई बार उन स्टूडेंट्स के लिए टॉक्सिक स्पेस बन जाती हैं, जो खुद को सिस-जेंडर और हेट्रोसेक्सुअल के रूप में नहीं पहचानते. वैसे दुनिया भर में LGBTQIA+ लोगों को बुलिंग, यातना और भेदभाव का शिकार बनाया जाता है. और इसके कई सामाजिक-राजनैतिक और सांस्कृतिक कारण हैं.

