दिनकर एक ऐसे कवि थे, जिनके लिए राष्ट्र का मतलब सिर्फ भूगोल नहीं, उसमें बसने वाली आम जनता थी. उनकी इसी प्रतिबद्धता ने उन्हें लोकतंत्र की मशाल उठाने वाला जन कवि बना दिया.26 जनवरी 1950 को देश के पहले गणतंत्र दिवस के मौके पर उन्होंने लिखा :
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