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लता में मजहबी तंगदिली होती तो हम सब उनके गजलों के खजाने से महरूम रह जाते

दिलीप कुमार की एक मजकिया टिप्पणी के बाद लता ने उर्दू सीखा और हमें सुनने को मिलीं उनकी खूबसूरत गजलें

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यह 1947 या 1948 की बात होगी, जब हिंदी सिनेमा के सबसे नामचीन एक्टर दिलीप कुमार को इतनी शोहरत नहीं मिली थी, कि उन्हें देखने भीड़ इकट्ठी हो जाए. वह काम के सिलसिले में मुंबई की ट्रेनों में आसानी से सफर कर लेते थे. एक दिन म्यूजिक डायरेक्टर अनिल बिस्वास, दिलीप कुमार और लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) एक ही ट्रेन के एक ही कम्पार्टमेंट में सफर कर रहे थे.

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