जुलाई का महीना. उमस भरी रात. समय करीब 11 बजे. मैं बिस्तर पर करवटें ले रहा हूं. नींद नहीं आ रही. एक आवाज का इंतजार है जो रोज गली के दूसरे छोर किसी घर से आती है. भरोसा है कि वो आवाज आए तो उसे सुनते-सुनते जरूर नींद आ जाएगी. तभी रेडियो बजने लगता है. आवाज आती है -
करोगे याद तो हर बात याद आएगी, गुजरते वक्त की हर मौज ठहर जाएगी ...
