कठुआ मामले के लिए बनी स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) की इकलौती महिला सदस्य श्वेतांबरी शर्मा ने द क्विंट को जो जानकारी दी, वह आपको अंदर तक हिला देगी, सोचने पर मजबूर भी करेगी. उन्होंने बताया कि उनकी जाति (ब्राह्मण) और धार्मिक पहचान की दुहाई देकर आरोपियों की तरफ से उन पर दबाव बनाने की कोशिश की गई.
श्वेतांबरी ने यह भी बताया कि स्थानीय पुलिस ताकतवर लोगों के इशारों पर आरोपियों के हक में काम कर रही थी. कठुआ मामले में इंसाफ अदालत को करना है, लेकिन जिस तरह से हिंदू एकता मंच के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर कई वकीलों ने चार्जशीट फाइल होने से रोकने की कोशिश की और मंत्रियों, नेताओं, पत्रकारों और खास विचारधारा से जुड़े बुद्धिजीवियों ने उनका बचाव किया, उससे लगता है कि कुछ तो गड़बड़ है.
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Topics: जम्मू- कश्मीर कठुआ रेप केस
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