अंग्रेजों ने भारत में अपनी पहली राजधानी कलकत्ता को बनाया था, जहां से उन्होंने 1912 तक देश भर में शासन किया, लेकिन यहां पर उन्होंने कभी भी किंग्स-वे का निर्माण नहीं किया. यहां पर उन्होंने क्ववींस-वे का निर्माण करवाया था, हालांकि इसका सीमित महत्व था. यह महारानी विक्टोरिया के भव्य स्मारक के सामने से गुजरने वाली एक छोटी सड़क थी, जिसका उद्घाटन ब्रिटिशों द्वारा किया गया था.
निश्चित तौर पर एक भव्य इम्पीरियल सिटी के केंद्र में स्थित यह मार्ग एक भव्य शाही द्वार नहीं था. हालांकि कलकत्ता ब्रिटिश साम्राज्य में दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला शहर था, लेकिन अंग्रेजों के लिए इसे एक शाही शहर के रूप में सोचना मुश्किल था. कलकत्ता के इतिहास ने इसके खिलाफ काम किया था.

