वक्त आ गया है कि हम अपने काम का आकलन करें, चाहे वो भारत के अंदर हो या विश्व स्तर पर. दुनिया भर की सरकारें इस महामारी का मुकाबला करने के लिए तैयार नहीं थीं. इसकी वजह साफ है. पूरे विश्व में सरकारें, खासतौर पर पश्चिमी देशों में, प्रदूषण फैलाने में इस कदर मशगूल रही हैं जैसे कि कोई कल आने ही नहीं वाला हो. अब प्रकृति ने पलटवार किया है और हम रास्ते तलाश रहे हैं.
और इस प्रक्रिया में, सरकारों ने अपने निर्देशों और परामर्शों से, हमारी स्वंतत्रता पर अंकुश लगा दिया है. कुछ लोग तो यह भी कहते हैं कि इसने लोकतंत्र की कमजोरी को बेनकाब कर दिया है. वहीं कुछ लोगों का मानना है कि मजबूत और निर्णायक सरकार, जो कि शक्तिशाली सत्ता अधिकार की निशानी होती है, अब एक सामान्य बात हो गई है.

