झारखंड में जैसे-जैसे पहले चरण के मतदान का वक्त नजदीक आ रहा है, विधानसभा चुनाव की गर्मी पठारी क्षेत्र में ठंड को पीछे छोड़ती जा रही है.
इस सियासी जंग में आदिवासी समुदाय के लिए आरक्षित 28 सीटें सत्तारूढ़ जेएमएम-कांग्रेस और बीजेपी के लिए बेहद अहम हैं.
बीजेपी लगातार "घुसपैठ" के मुद्दे को आदिवासियों की पहचान से जोड़कर उन्हें आंदोलित करने के अभियान में लगी हुई है, जबकि जेएमएम-कांग्रेस ने सरना धर्म कोड और अधिवास नीति (भूमि अभिलेखों के लिए कट-ऑफ वर्ष 1932 के आधार पर) पर ध्यान केंद्रित करके जवाब दिया है.

