कहते हैं कि वक्त बलवान होता है. वह कुछ भी करा सकता है. मुल्क के पाॅलिटिकल सिनेरियो में ऐसा कुछ नजर आ रहा है जो इस बात की जमानत है कि ‘वक्त सब पर भारी है’. कभी नदी के दो किनारे की तरह नजर आने वाली समाजवादी पार्टी(SP) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) आज गठबंधन बनाकर एक साथ चुनाव मैदान में उतरने जा रही हैं.
मेन स्ट्रीम की पाॅलिटिक्स को ना-ना करने वाली प्रियंका गांधी वाड्रा कांग्रेस की महासचिव बन कर उत्तर प्रदेश के उस पूर्वांचल को हैंडल कर रही हैं, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र भी आता है. प्रियंका का राजनीति में उतरना और एसपी-बीएसपी के गठबंधन की खिचड़ी बीजेपी को हजम नहीं हो रही है. हजम होना भी नहीं चाहिए, क्योंकि यह राजनीति की जंग है और इसमें सब जायज है. ऐसे में अदालत जैसे पाक साफ प्लेटफाॅर्म या सीबीआई जैसी जांच एजेंसी के इस्तेमाल से भी किसी को गुरेज नहीं है.
