लोकसभा अध्यक्ष ने भले ही 23 दिसंबर को संसद के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन कांग्रेस पर की गई अपनी यह टिप्पणी वापस ले ली हो कि उसकी ‘राष्ट्रहित’ में कोई दिलचस्पी नहीं है, पर ज्यादातर लोगों को लगता है कि सुमित्रा महाजन सही बात कह रही थीं.
जुवेनाइल जस्टिस बिल और कुछ अन्य को छोड़ दिया जाए, तो पूरे सत्र में कोई उल्लेखनीय काम नहीं हुआ. इसके लिए कांग्रेस की वही पुरानी रणनीति जिम्मेदार है, जिसमें वह संसद से जुड़े कामों को लटकाने में यकीन रखती है. यही रणनीति कांग्रेस को धीरे-धीरे अलोकप्रिय कर रही है.
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Topics: कांग्रेस शीतकालीन सत्र
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