कहते हैं कि राजनीति में एक हफ्ता बहुत लंबा समय होता है. अगस्त 2020 का तीसरा हफ्ता ऐसा ही समय था. यह हफ्ता बहुत लंबा और भारी था, यह जरूर है कि देश को इसका काफी लंबे समय से इंतजार था.
विचारों में भिन्नता या नाइत्तिफाकी एक स्वस्थ समाज, एक जीवंत जनतंत्र की आयु लंबी करती है. एक साल पहले तक इसने मानो चुप्पी साध ली थी. जैसे 1.3 अरब भारतीयों ने मुंह पर ताले लगा लिए हों. बेशक, आलोचक, एक्टिविस्ट्स, छात्र नेता और तेजतर्रार पत्रकार कभी चुप नहीं बैठे, और न ही सत्ताधारियों के समर्थक, चाटुकार, और आज की भाषा में ट्रोल्स. उनके बीच मुकाबला जारी रहा- तीखा और उग्र.
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