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भारतीय संविधान की प्रस्तावना में 'पंथनिरपेक्ष' और 'समाजवादी' क्यों बने ही रहने चाहिए?

Indian Constitution: 'पंथनिरपेक्ष' और 'समाजवादी', इन दो शब्दों को 42वें संशोधन के माध्यम से प्रस्तावना में जोड़ा गया था.

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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) को अक्सर कई कारणों से खास चैप्टर का दर्जा मिलता है.

पहला, जैसा की 1973 में केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य मामले में भारत के सर्वोच्च न्यायालय (SC) ने जिक्र किया था. प्रस्तावना जजों के लिए संविधान की व्याख्या का एक उपयोगी साधन है. यह संवैधान के तमाम अनुच्छेदों के पीछे की असली मंशा का पता लगाना का सबसे आसान तरीका है. इसके बिना वे मुश्किल और पेचीदा, दोनों लग सकते हैं.

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