“बुद्ध की धरती भारत, म्यामांर के आर्मी जनरल्स के साथ कैसा सलूक करेगा”, भारत के एक पूर्व राजनयिक ने जोरदार शब्दों में पूछा. “हमें दुनिया के सामने एक मिसाल पेश करनी चाहिए और लोकतांत्रिक मूल्यों को कायम रखना चाहिए.” दूसरे राजनयिक ने पहले के स्वर से स्वर मिलाया. “अगर हम ऐसा ही बर्ताव करते रहे, जैसा अभी कर रहे हैं तो हमें क्वाड का सदस्य बने रहने का कोई हक नहीं”- तीसरे ‘एक्सपर्ट’ ने सिद्धांतवादी बयान दिया. “इसके बावजूद कि भारत अब लोकतंत्र रहा ही नहीं.” चौथे ने दलील दी.
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म्यांमार में हत्याओं पर भारत चुप, कुछ मुश्किलें-कुछ मजबूरियां
हमें देश निर्माण और अपनी सीमाओं को चाक-चौबस्त रखने पर ध्यान देना चाहिए, न कि नैतिकता का दिखावा करना चाहिए

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