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न्यूनतम मजदूरी को जूझता भारत, क्या 'जिंदगी गुजारने के लिए जरूरी वेतन' को लागू कर पाएगा?

भारत 2025 तक अपने न्यूनतम वेतन को 'जीवन गुजारने के लिए जरूरी वेतन' में तब्दील करने का लक्ष्य बना रहा है

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अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (International Labour Organisation’s) की गवर्निंग बॉडी ने 13 मार्च को 'जीवन गुजारने के लिए जरूरी वेतन' (living wages) पर हुए समझौते को सबके सामने रखा. यह समझौता वेतन नीतियों पर विशेषज्ञों की त्रिपक्षीय बैठक के दौरान फरवरी में हुआ था.

'जीवन गुजारने के लिए जरूरी वेतन' की नई परिभाषा में कहा गया है कि यह "वर्कर्स और उनके परिवारों के लिए सभ्य जीवन स्तर मेंटेन करने के लिए आवश्यक वेतन स्तर है, जो देश की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और सामान्य घंटों के दौरान किए गए काम के लिए गणना की जाती है."

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