अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने हाल ही में भारत के साथ अपना आर्टिकल IV परामर्श पूरा किया और अपने कार्यकारी बोर्ड की रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें भारत की बढ़ती ऋण समस्या की चर्चा की गई है.
इसके साथ-साथ “अस्थिर मुद्रास्फीति” का दौर, “कम रोजगार दर” (खासतौर से अनौपचारिक क्षेत्र में ) और ग्लोबल सप्लाई चेन में संभावित रुकावट, “भारत का बढ़ता राजकोषीय दबाव” अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक है. रिपोर्ट पर सरकार की प्रतिक्रिया उम्मीद के मुताबिक, संस्था की चेतावनी का खंडन करने की ही थी.

