आजादी के अमृत महोत्सव (Azadi Ka Amrit Mahotsav) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दक्षिण एशियाई देशों तक हाथ बढ़ाने के दुर्लभ मौके को मिस कर दिया, जिसके केंद्र में भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच दोस्ताना संबंध हों. उन्हें पाकिस्तान, बांग्लादेश और SAARC क्षेत्र के दूसरे देशों के नेताओं को इस वर्षगांठ समारोह में बुलाना चाहिए था. 2014 में अपने शपथ ग्रहण समारोह में उन्होंने ऐसा ही किया था. हमारे पड़ोसी देशों के नेताओं ने उनके निमंत्रण को स्वीकार भी किया था और नई दिल्ली आए थे. सबने मिलकर दक्षिण एशिया में एकजुटता की उम्मीद का संदेश दिया.
मोदी को आजादी की 75वीं सालगिरह पर भी ऐसा ही करना चाहिए था, जो कि किसी भी लिहाज से उनके शपथ ग्रहण समारोह से ज्यादा ऐतिहासिक मौका था.

