2022 को एक अहम दशक की वर्षगांठ के तौर पर रेखांकित किया जा सकता है.
अब से 10 साल यानी एक दशक पहले भारत में गरीबी रेखा के लिए नए मानक तैयार करने के लिए रंगराजन समिति बनाई गई थी. इस समिति ने 2014 में अपनी एक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी लेकिन उस पर सरकार ने अभी तक कोई फैसला नहीं किया है. इसके साथ ही योजना आयोग द्वारा गरीबी के आंकड़े आखिरी बार 2011-12 के लिए जारी किए गए थे. उस समय जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार देश में गरीबों की संख्या 26.98 करोड़ या कुल जनसंख्या का 21.9 फीसदी आंकी गई थी. तब से लेकर अब तक 10 साल गुजर चुके हैं लेकिन भारत में गरीबी का कोई आधिकारिक अनुमान जारी नहीं किया गया है.
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