इतिहास हमारी अस्मिताओं के निर्माण में अहम भूमिका अदा करता है. इस अस्मिता का निर्माण हमेशा किसी न किसी के विरोध में होता है, यानी एक ऐतिहासिक दुश्मन तैयार किया जाता है] ताकि अस्मिता और वर्चस्व का संघर्ष हमेशा कायम रहे. इसलिए इतिहास लेखन बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य रहा है.
अक्सर इतिहासकारों की कलम सत्ता के इशारों पर चलती है. सवाल उठता है कि कौन इतिहास लिख रहा है और किसका इतिहास लिख रहा है. उसके इतिहास में नायक कौन बनता है और कौन खलनायक. हालांकि बुद्धिजीवी वर्ग (जिसमे छात्र वर्ग भी आता है) शुरू से इतिहास को पैनी नजर से देखता आ रहा है.
लेकिन भारत की छात्र राजनीति के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है कि इतिहास पर चर्चा और अवलोकन समाज का वो तबका कर रहा है जिसे अब तक हाशिये पर रखा गया, जिसे शिक्षा के अधिकार से वंचित रखा गया और जिसका आर्थिक और सामजिक रूप से शोषण होता रहा.

