जब भी कोई हिंदू त्योहार नजदीक होता है, तब सोशल मीडिया पर पारंपरिक 'फेस्टिवल' फूड की रेसिपियों और तस्वीरों की बाढ़ आ जाती है. आप नोटिस कर सकते हैं कि इन तस्वीरों में कहीं मांस या मीट नहीं दिखाई देता है, लेकिन त्योहारों के दिनों में भी हिंदू मीट का आनंद लेते हैं. वास्तव में, कुछ अवसरों पर यह प्रसाद का हिस्सा भी होता है. तो ऐसा क्यों है कि हम केवल शाकाहारी व्यंजनों से सजी-लदी हुई प्लेट्स देखते हैं और उन्हें शानदार उत्सवों के साथ जोड़ते हैं.
पुरातत्वविद् और पाक मानवविज्ञानी डॉ कुरुश एफ दलाल कहते हैं कि "कुल मिलाकर आज अधिकांश हिंदू परंपराओं में, विशेष रूप से धार्मिक प्रकृति वाले मौकों पर शाकाहार की प्रबलता को देख सकते हैं... क्योंकि ये उत्सव ब्राह्मण-संचालित हैं. और चूंकि अधिकांश ब्राह्मण वेजिटेरियन यानी कि शाकाहारी हैं, इसलिए शाकाहार सिद्धांत या शाकाहारवाद की प्रधानता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि "यहां पर सिर्फ शाकाहारवाद है."

