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हिंदी दिवस विशेष: हिंदी को मैली-कुचैली, गंदी हो जाने दीजिए

हिंदी को उसके खोल से बाहर निकलकर आजाद हवा में सांस लेने दो

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[ये आर्टिकल क्‍विंट हिंदी पर पहली बार 14 सितंबर, 2018 को पब्‍ल‍िश किया गया था. हिंदी दिवस के मौके पर हम फिर से इसे पाठकों के लिए पेश कर रहे हैं ]

कुछ वक्त पहले किसी मैगजीन में एक साहब ने हिंदी में भाषाई शुद्धता बरतने की वकालत करते हुए लिखा--- “सवाल ये है कि ऐसे में जब दुनिया की तमाम भाषाएं अपने अस्तित्त्व के लिए जूझ रहीं हैं तो क्या हिंदी का वजूद सुरक्षित रह पाएगा? हिंदी में मिलावट का दौर यूं तो आजादी के बाद से ही थोड़ा बहुत शुरू हो गया था. संसद में इसको लेकर बहस-मुबाहिसे चलते रहे हैं.“

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