जनता की याददाश्त छोटी और चंचल, दोनों होती है. फिर भी, लेखक को 3 फरवरी 2019 की कोलकाता (Kolkata) में घटी घटनाएं अच्छी तरह याद हैं. CBI (केंद्रीय जांच ब्यूरो) के अधिकारियों की एक टीम कथित घोटाले के मामले में पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से "पूछताछ" करने के लिए उनके आवास पर पहुंची थी.
कुछ ही मिनटों में ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) वहां पहुंचीं और इसके खिलाफ धरने पर बैठ गईं. स्थानीय पुलिस ने पांच सीबीआई अधिकारियों को भी हिरासत में लिया. ममता बनर्जी ने न केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आलोचना की, बल्कि सार्वजनिक रूप से अपने "पुलिसबलों" को केंद्रीय एजेंसियों द्वारा परेशान और हतोत्साहित होने से बचाने की कसम खाई.
कई महीने लग गए जब CBI राजीव कुमार से सवाल पूछ सकी, वह भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए "तटस्थ" स्थान पर. कई लोगों ने दीदी द्वारा इस्तेमाल की गई "सड़क" रणनीति की आलोचना की थी.
हालांकि, यह आर्टिकल हेमंत सोरेन (Hemant Soren) के बारे में है.

