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अप्रैल, स्कैम और द बिग बुल: क्या नियामकों ने हर्षद मेहता मामले से कुछ सीखा है ?

Harshad Mehta Scam: सवाल यह है कि क्या नियामकों ने हर्षद मेहता घोटाले से कोई सबक सीखा?

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यह आर्टिकल चार-भाग वाली 'अप्रैल' श्रृंखला का तीसरा भाग है, जिसमें महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं या नीतियों पर दोबारा गौर किया गया है और यह बताया गया है कि कैसे उनसे सीखे गए सबक आज की राजनीति और समाज में प्रासंगिक बने हुए हैं.

अप्रैल 1992 में बिजनेस टुडे मैगजीन में हमने, हर्षद मेहता (Harshad Mehta) भारतीय शेयर बाजारों (Indian Stock Market) के उभरते हुए सितारे और तेज तर्रार बुल (Bull) पर एक कवर स्टोरी प्रकाशित की थी. इसके कवर में अट्रैक्टिव दिखने वाले मेहता को अपनी टोयोटा लेक्सस कार के साथ वर्ली समुद्र के पास कहीं पोज देते हुए दिखाया गया है. कुछ सहयोगियों और हमारे वरिष्ठों ने हमें चेतावनी दी थी कि हर्षद मेहता के इर्द-गिर्द घूमती यह परियों की कहानी सच नहीं है और यह बुलबुला जल्द ही फूट जाएगा.

जैसा कि भविष्यवाणी की गई थी, कवर स्टोरी प्रकाशित होने के कुछ दिनों के अंदर ही यह बुलबुला फूट गया.

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