9 नवंबर 2019 को मैं उबर कैब से एक जगह मध्यस्थता करने के लिए जा रहा था, तब चीफ जस्टिस रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) ने कोर्ट की ओर से सर्वसम्मत फैसले को पढ़ना शुरू किया था और मैं अपने कैब ड्राइवर को ये फैसला उसी तरह सुनाता रहा जैसे युगों-युगों पहले मेरे ही नाम के एक शख्स ने एक नेत्रहीन राजा को बताया था. सभी अपडेट जैसे कि तोड़फोड़ को फैसले में गलत बताया गया. वादी अपना दावा भी कोर्ट में कानूनी तौर पर साबित कर नहीं पाए. सेकुलरिज्म अभी भी देश की नींव है, ये सब बातें फैसले में थी.
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Gyanvapi Row: क्या अयोध्या के बाद भी भारत में धर्मनिरपेक्षता पर हमला जारी रहेगा?
आठ साल गुजरने के बाद भी वर्तमान सरकार ने 1991 के विशेष पूजा कानून को संशोधित करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया था.

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