“गोखले की बात निराली है. उन्होंने मेरे हृदय में मेरे राजनीतिक गुरु की तरह निवास किया. उनसे मिलने से पहले मेरे मन में भय था. लेकिन उन्होंने एक क्षण में मेरे मन का सारा भय दूर कर दिया...और जब मैंने उनसे विदा ली, उस समय मेरे मन से एक ही आवाज आई - यही है मेरा गुरु.”
ये शब्द हैं महात्मा गांधी के, जो उन्होंने अपने राजनीतिक गुरु गोपाल कृष्ण गोखले से पहली मुलाकात के बारे में लिखे थे. गोखले से गांधी की ये मुलाकात पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज में हुई थी. गांधी, फिरोजशाह मेहता की सलाह पर मुंबई से पुणे गए थे, जहां वो गोखले के अलावा लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक से भी मिले थे.
इस मुलाकात के बाद गांधीजी ने तीनों महान नेताओं की खासियत बताते हुए लिखा :
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Topics: Death Anniversary कांग्रेस महात्मा गांधी
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