ऐसी खबरें आ रही हैं कि रक्षा मामलों की संसदीय समिति ने केंद्र या राज्य स्तर की सरकारी नौकरी में दिलचस्पी रखने वालों के लिए पांच साल की कंपलसरी मिलिट्री सर्विस का प्रस्ताव रखा है. समिति चाहती है कि कार्मिक मंत्रालय इसका प्रपोजल केंद्र सरकार के सामने रखे.
मिलिट्री सेवा देना बड़ी चुनौती
पहली नजर में समिति के प्रस्ताव में ज्यादातर देशवासियों की भावनाओं की झलक मिलती है, जिनका मानना रहा है कि ‘सभी नागरिकों’ को ऐसी ट्रेनिंग देशहित में है. इससे नागरिकों को बड़ी संख्या में सेना के आदर्शों, अनुशासन, ट्रेनिंग, कर्तव्य और देशभक्ति की भावना को सीखने-समझने में मदद मिलेगी.
हालांकि, यह भी समझना जरूरी है कि मिलिट्री सर्विस के लिए इतनी बड़ी संख्या में पुरुषों और महिलाओं को चुनना आसान नहीं होगा. उन्हें मिलिट्री सेवा देने का काम भी चुनौतीपूर्ण होगा.
इजरायल जैसे देशों से तुलना ठीक नहीं
इस मामले में हमारे लिए इजरायल, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड या नॉर्डिक देश मिसाल नहीं हो सकते, जहां कंपलसरी मिलिट्री सर्विस का सिस्टम है. उन देशों की आबादी कम है और उनकी चुनौतियां भारत से बिल्कुल अलग हैं.
हालांकि, इसके साथ यह भी कहना होगा कि संसदीय समिति की सिफारिशों में कुछ भी गलत नहीं है. उसने एक ऐसा प्रस्ताव भेजा है, जिसमें सरकारी नौकरी की ख्वाहिश रखने वाले गजटेड अधिकारियों की खातिर अनिवार्य मिलिट्री सेवा की बात कही गई है.

