बहुत मशहूर कहावत है चाहे जितनी बेहतर योजना बना लें, नियति या दुर्भाग्य से बचा नहीं जा सकता. कृषि बाजार में सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए हाल में लागू कानून इसका शानदार उदाहरण है कि किस तरह अच्छे इरादे के साथ लाया गया विधेयक भी मुखर विरोध की वजह बन सकता है. इसकी वजह है इन सुधारों की खराब मार्केटिंग और प्रभावित तबके से पर्याप्त सलाह मशविरा नहीं करना.
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