ADVERTISEMENTREMOVE AD
Members Only
lock close icon

मोदी सरकार का कृषि सुधार: सोची समझी योजना क्यों हो जाती हैं बेकार

निजी बाजार को इजाजत देने और अनुबंध खेती को बढ़ाना देने वाले ये दोनों विधेयक वास्तव में स्वभाव से प्रगतिशील हैं

Updated: 
story-hero-img
i
Aa
Aa
Small
Aa
Medium
Aa
Large

बहुत मशहूर कहावत है चाहे जितनी बेहतर योजना बना लें, नियति या दुर्भाग्य से बचा नहीं जा सकता. कृषि बाजार में सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए हाल में लागू कानून इसका शानदार उदाहरण है कि किस तरह अच्छे इरादे के साथ लाया गया विधेयक भी मुखर विरोध की वजह बन सकता है. इसकी वजह है इन सुधारों की खराब मार्केटिंग और प्रभावित तबके से पर्याप्त सलाह मशविरा नहीं करना.

Published: 
Become a Member to unlock
  • Access to all paywalled content on site
  • Ad-free experience across The Quint
  • Listen to paywalled content
  • Early previews of our Special Projects
×
×