कौन जानता था… यह कि 2004 में लड़कियों को ‘हॉट या नॉट’ रेट करने के मकसद से शुरू हुई एक प्रैंक वेबसाइट आने वाले दिनों में एक ऐसा ग्लोबल प्लेटफॉर्म बन जाएगी, जिसे म्यांमार में नरसंहार कराने, अमेरिका में चुनावों को पलटाने और भारत में दंगे भड़काने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. फेसबुक ने सिर्फ 17 सालों में संवाद और जन भागीदारी के नए नियम लिख दिए. हालांकि अमेरिकी कांग्रेस के सामने हाल की व्हिसिलब्लोअर टेस्टिमनी और कंपनी के आंतरिक दस्तावेजों ने काफी चौंकाने वाला ब्यौरा दिया है. इसमें बताया गया है कि फेसबुक के नए नियमों की बदौलत किस तरह विश्व स्तर पर नफरत, गलफहमी फैलाने वाली सूचनाओं और गुस्से का दलदल तैयार हुआ था.
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''Facebook ने सिर्फ 3 हफ्ते में मुझे नफरत की तरफ धकेल दिया''
''भारत की 22 भाषाओं में से सिर्फ 5 भाषाओं की हेट पोस्ट पकड़ पा रहा फेसबुक''

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