बच्चों की शिक्षा (Child Education) के प्रश्न को बस शिक्षाविदों, नीतिनिर्धारकों और समाजशास्त्रियों पर नहीं छोड़ देना चाहिए. विशेषज्ञता के अपने फायदे हैं पर इसकी वजह से हर चीज हवाबंद संदूकों में बंद भी हो जाती है. परिणाम यह होता है कि हमारे अपने जीवन के साथ जो चीजें गहराई से जुडी हैं, उनके बारे में जानने के लिए भी हम विशेषज्ञों के पास जाते हैं.
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शिक्षक को बच्चों की कॉपी पर नहीं लिखना चाहिए- “गुड, वेरी बैड, वेरी पुअर”
असफल होना कोई जुर्म नहीं. सफलता की उपासना कोई अंतिम लक्ष्य नहीं है.

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