वे आए, उन्होंने देखा, उन्होंने जीता और राज किया- और उन्होंने दिल से प्रेम किया.
धर्मेंद्र कोई साधारण इंसान नहीं थे. ऐसे धन्य व्यक्तित्व, जिन्हें ईश्वरीय शक्तियां धरती पर भेजती हैं, परिवार, मित्रों और प्रशंसकों को सिर्फ आनंद और खुशी ही नहीं देते, बल्कि अपने चुने हुए क्षेत्र में प्रतिभा का सर्वोच्च स्तर और अमरता भी प्राप्त करते हैं.
पेशेवर तौर पर धर्मेंद्र कौन थे? सिर्फ एक अभिनेता? बिल्कुल नहीं. वे निर्माता भी थे—आधिकारिक रूप से (घायल, बरसात) और पर्दे के पीछे भी (समाधी, प्रतिज्ञा, क्रोधी, बेताब, सितमगर, सोचा ना था, अपने, यमला पगला दीवाना आदि). वे गीतकार भी रहे हैं (यमला… के गीत ‘कद्द के बोतल’). उन्होंने अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा उसी फिल्म उद्योग में वापस लगाया, जिसने उन्हें इतना कुछ दिया था, और इसी के तहत उन्होंने सनी सुपर साउंड स्टूडियो कॉम्प्लेक्स भी बनवाया.
और धर्मेंद्र का क्या, वो इंसान, जिसने खुद माना था कि वो मुंबई (वो भी उस समय के इकलौते टैलेंट कॉन्टेस्ट—फिल्मफेयर यूनाइटेड प्रोड्यूसर्स टैलेंट कॉन्टेस्ट के जरिए) “सिर्फ एक फ्लैट और एक फिएट (कार)” खरीदने आया था?

