मेरे हाथों में खून है. और लेडी मैकबेथ के अनुभव से मैं जानती हूं कि “अरब की सारी खुशबू भी मेरे छोटे हाथों को और सुगंधित नहीं बना सकती”. तो मैं उनके बजाए मैडम डीफार्ज की ओर मुखातिब होती हूं और अपने ऊपर लगे कलंक में कुछ शब्द जोड़ती हूं- मेरे सहयोगी की उन जटिलताओं को सामने लाएं, जिन्होंने दिल्ली के वंचित इलाकों में नरसंहार फैलते वक्त अपने इन हाथों को सूंघने से मना कर दिया.
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