ADVERTISEMENTREMOVE AD
Members Only
lock close icon

दलित जाति के बंधन में बंधकर जातिवाद से लड़ेंगे तो उन्नाव,हाथरस,जालोर कैसे रुकेगा

जालोर की घटना एक उदाहरण है जिसे मीडिया ने इतना दिखाया कि लाखों लोग बिना संगठित हुए पहुंच गए.

Published: 
story-hero-img
i
Aa
Aa
Small
Aa
Medium
Aa
Large

दलितों और आदिवासियों की खबर मीडिया में तभी छपती है जब कोई उत्पीड़न होता है. जालोर में इंद्र कुमार मेघवाल की हत्या की ख़बर मीडिया में खूब रही. अब मध्य प्रदेश के सागर में जैन मंदिर में दलित बच्चे की पिटाई की खबर है. इतना स्थान मीडिया में इनके शिक्षा, विकास और नौकरी आदि के लिए मिला होता तो लाखों का उत्थान हो जाता. करोड़ों दलित बच्चों का वजीफा नहीं बढ़ा, मिलता है तो बहुत बाद में. लाखों बच्चों की स्कॉलरशिप का गबन हो जाता है. लाखों करोड़ के स्पेशल कॉम्पोमेंट प्लान और ट्राइबल सब प्लान के पैसे का दुरपयोग होता रहता है. लाखों सरकार में पद खाली हैं.

मीडिया में ऐसे मुद्दे को स्थान कहां मिलता है. जो मीडिया सामाजिक और राजनैतिक नेताओं के अच्छे काम को स्थान नहीं देती वही उत्पीड़न होने पर ही क्यों सक्रिय होती है?
Become a Member to unlock
  • Access to all paywalled content on site
  • Ad-free experience across The Quint
  • Listen to paywalled content
  • Early previews of our Special Projects
×
×