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भारत की फिल्में बदल रही हैं क्योंकि अपनी कहानियां सुनाने खुद बहुजन आगे आ रहे हैं

Dalit Discourse in Cinema: दलित केंद्रित फिल्मों ने अब एक नया मोड़ ले लिया है. OTT उसका धरातल तैयार कर रहे हैं.

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दलित केंद्रित फिल्मों (Dalit Centric Films) ने अब एक नया मोड़ ले लिया है. OTT उसका धरातल तैयार कर रहे हैं. हाल ही में प्राइम वीडियो पर रिलीज, दहाड़ और नेटफिल्क्स पर रिलीज कटहल से यह साफ होता है. इन दोनों प्रस्तुतियों में प्रोटैगनिस्ट, यानी मुख्य पात्र दलित महिला है. दोनों अपनी ही बिरादरी की लापता लड़कियों की तलाश कर रही हैं. आरोपी तथाकथित अगड़ी जाति का है. इस कहानी के बीच जातिगत गैरबराबरी की परतें उधड़ती जाती हैं. काम की जगहों पर रोजमर्रा होने वाला भेदभाव दिखाई देता है. दहाड़ की अंजली भाटी (सोनाक्षी), और कटहल की महिमा बसोर (सान्या) पढ़ी-लिखी हैं, और पुलिस की आला अफसर, लेकिन फिर भी जातीय श्रेष्ठता और उसके अधिकार के अहंकार की शिकार हैं.

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