कई लोगों का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) सिर्फ अगड़ी जातियों की पार्टी होने से बेहतर हुई है. 2014 के बाद बीजेपी एक छतरी संगठन के तौर पर उभरी है जो दलित-बहुजन वर्गों को अपनी राजनीतिक लामबंदी का एक प्रभावी हिस्सा बनने की ‘अनुमति’ देती है. बीजेपी ने स्मार्ट-सामाजिक-सांस्कृतिक रणनीति को लागू कर दलितों के अंदर के वर्गों को प्रभावित किया है. इसके अलावा बाबा साहेब अंबेडकर को एक राष्ट्रवादी प्रतीक बना कर और सामाजिक न्याय की नीतियों की रक्षा में संवैधानिक जनादेश के पालन करने का वादा कर दक्षिण-पंथ ने दलितों के साथ एक प्रभावशाली संबंध बनाया है.
हालांकि जातिगत अत्याचारों का बढ़ना और दलित कार्यकर्ताओं के खिलाफ बढ़ती पुलिस कार्रवाई दिखाती है कि दलित एजेंडा के साथ निपटने में ईमानदारी की कमी है. इसके बदले, अंबेडकरवादी दलित कार्यकर्ताओं के खिलाफ भावनात्मक मुद्दे उठा कर उनके खिलाफ एक व्यवस्थित सार्वजनिक प्रतिरोध का निर्माण किया जा रहा है.
