(पहले यह ओपिनियन पीस 18 अगस्त 2023 को पब्लिश किया गया था. 20 दिसंबर 2023 को लोकसभा में तीन क्रिमिनल लॉ बिल के पास होने के बाद इसे अपडेट कर फिर पब्लिश किया जा रहा है.)
भारत के फौजदारी कानूनों (Criminal Laws Reform) में सुधार लाने वाले बताए जा रहे तीन बिल, शीतकालीन सत्र के दौरान 20 दिसंबर को लोकसभा में पास कर दिए गए. इस बिल में पूरी तरह हिंदी शब्दों में पिरोए गए हैं. भले ही बिल का मसौदा अंग्रेजी में है लेकिन इससे हिंदी थोपे जाने के खिलाफ हलचल बढ़ गई. बिल में 80 प्रतिशत से ज्यादा तो ब्रिटिश कानून का दोहराव भर है. ये बिल हैं-
भारतीय न्याय संहिता विधेयक
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता विधेयक
भारतीय साक्ष्य विधेयक
यह क्रमशः इंडियन पीनल कोड (I.P.C.), द कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर (Cr.P.C) और इंडियन एविडेंस एक्ट की जगह लेंगे. क्या यह नाम रखने के पीछे उनकी कोई मंशा है या यह बिना गलत इरादे का प्रतीकवाद भर है?

