एक मामूली सी बात से केंद्र की मोदी सरकार को दिक्कत है कि उसकी आलोचना क्यों होती है? दुनिया में आजतक ऐसी कोई भी सरकार नहीं हुई, जिसकी आलोचना नहीं हुई हो. मोदी कहने को तो रैलियों में कहते रहे हैं कि आलोचक जितने मुखर होंगे, उनकी चमक उतनी बढ़ेगी. उनकी ताकत उतनी बढ़ेगी. लेकिन सच ये है कि आलोचना उन्हें भयभीत करती है. इसलिए अपने तमाम आलोचकों को विपक्षी स्वर मान लिया है. इसलिए जिन मोर्चों पर वह नाकाम हो रहे हैं, उनकी आलोचना में उन्हें साजिश नजर आने लगी है.
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Topics: कोरोनावायरस अविनाश दास
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