भूटान के डोकलाम पठार में चीनी और भारतीय फौजों के बीच बीते 16 जून को शुरू हुई तनातनी अब तक जारी है, जिसे तीखे जुबानी तीर और बढ़ा रहे हैं.
बीजिंग से निकलने वाले एक अखबार ग्लोबल टाइम्स ने हालांकि अपनी टिप्पणी (3 जुलाई) में सावधानी से ‘युद्ध’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा है, “अगर भारत और चीन के बीच तनाव को ठीक से संभाला नहीं गया, तो युद्ध की भी संभावना है.”
दिल्ली के बयान भी उतने ही कड़े दिखाई देते हैं, जब रक्षामंत्री अरुण जेटली कहते हैं कि यह 1962 वाला भारत नहीं है. यहां अक्टूबर 1962 के सीमा युद्ध का संदर्भ दिया गया है, जब चेयरमैन माओ की तरफ से भारतीयों को अपमानजक सबक ‘सिखाया’ गया था.
इस पर बीजिंग का जवाब चिढ़ाने वाला था, जिसमें दोनों एशियाई महादेशों के बीच सैन्य शक्ति और आर्थिक संपन्नता का अंतर चीन के पक्ष में होने का हवाला दिया गया था.

