1991 में भारत में उदारीकरण के साथ, बैंकिंग की दुनिया की चमकती शख्सियत चंदा कोचर की गिरफ्तारी सिर्फ एक उगते सूरज के अवसान की कहानी नहीं. आईसीआईसीआई (ICICI Bank) की पूर्व सीईओ के साथ जुड़ा यह घोटाला, उससे कहीं ज्यादा, गहरे राज खोलता है.
बेशक, विस्तृत जांच से ही पता चलेगा कि क्या चंदा अपने चमक-दमक भरे करियर, जिसके चलते उन्हें देश का तीसरा सर्वोच्च सम्मान पद्म विभूषण मिला, के साथ लालच के हाथों मजबूर हुईं या हालत के चलते- या भोलेपन की बलि चढ़ गईं. लेकिन वह लोकप्रिय शख्सीयत हैं, और मामले पर सबका ध्यान भी है, इससे कोई बैंकर उनसे सबक ले सकता है.

