केंद्र सरकार ने दिल्ली में सेवाओं पर चुनी हुई सरकार के नियंत्रण को परिभाषित करने वाले सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के फैसले को पलटने के लिए अध्यादेश लाया. इसके एक हफ्ते बाद, दो चीजें सामने आईं हैं: पहली, गैर-एनडीए पार्टियों का बहुमत स्पष्ट तौर पर दिल्ली की सत्ताधारी AAP (आम आदमी पार्टी) का समर्थन करता प्रतीत होता है और दूसरी, ऐसा लगता है कि आम आदमी पार्टी अध्यादेश के खिलाफ कांग्रेस पार्टी के समर्थन पर निर्भर रहने की गलती कर रही है.
यह लगभग तय है कि नए संसद भवन में होने वाले मानसून सत्र के दौरान जब इस अध्यादेश को विधेयक के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा, तो लोकसभा में इसका पारित होना महज एक औपचारिकता होगी और थोड़ा-बहुत शोर-शराबे के साथ यह राज्यसभा में भी बिना किसी परेशानी के पारित हो जाएगा. आगे चलकर कुछ महीनों में इसे कानून बना दिया जाएगा.

