क्या भारत सरकार एक बार में और हमेशा के लिए यह तय कर सकती है कि वो इतिहास के साथ क्या करना चाहती है? हालिया सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट ने एक बार फिर से इतिहास, उपनिवेश पर सलेक्टिव नजरिए की बहस शुरू कर दी है. हमने विस्टा प्रोजेक्ट के उद्घाटन पर एक जोरदार महोत्सव देखा. अगले दो साल में निश्चित तौर पर और भी बहुत कुछ होने वाला है. हम सबको अब कुछ-कुछ अंतराल के बाद इस तरह के बड़े भव्य समारोहों की आदत हो चुकी है, और यह हमारी रोजमर्रा की जो तकलीफें हैं, उससे हमारा ध्यान बंटा देती है.
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Topics: Central Vista project
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